शुक्रवार, 24 दिसंबर 2010

Lokswaraj

लोकस्वराज            हमारा लक्ष्य समेकित रूप से जन विकास तथा राष्ट्रवाद को लोगों के आचार, विचार, व्यवहार, शिक्षा, व्यवसाय और संस्कृति तक पहुँचाना है, जिससे प्रत्येक व्यक्ति अपनी दिनचर्या में भी एक समग्र सांस्कृतिक चेतना से जुड़ा रहे. हम समस्यायों के विरुद्ध संघर्ष नहीं अपितु समस्यायों के कारण को जानकर उसके लिए एक ऐसा समाधान का मार्ग प्रसस्त करना है जो सर्वोदयी (सब का विकास करने वाला) हो. हमारा लक्ष्य व्यक्ति, समाज या व्यवस्था में परिवर्तन नहीं अपितु स्वयं में ऐसा परिवर्तन लाना है जिससे हम व्यक्ति, समाज व व्यवस्था को और भी सुद्रढ़ व लोक कल्याणकारी बना सकें. स्वयं को इतना सामर्थ्यवान बनाना है की समस्याएं ही न उत्पन्न हों.
           इस कार्य में उन सभी को तन-मन-धन से समर्पण करना होगा जो कि स्वयं, समाज व व्यवस्था का विकास चाहते हैं. आपका विकास होने से ही समाज व राष्ट्र का विकास संभव है:- 'नर से नारायण' अर्थात व्यक्ति से ही सभी विशाल संस्थाओं, शक्तियों व व्यवस्थाओं का निर्माण होता है. हम कोई नै विचारधारा समाज में नहीं फैलाना चाहते, बल्कि सामाजिक विचारधारा कि उपलब्धियों से सभी को जोड़ना चाहते हैं.
            यदि आपमें समर्पण, सहस, धैर्य और आकांक्षा है तो संसाधन, ज्ञान, लक्ष्य और मार्ग तो आपको स्वयं अर्जित हों जायेंगे.
चलो स्वयं कि ओरऊंचाई नहीं गहराई मेंबहार नहीं अंदरदूर नहीं निकट